कभी-कभी क्रिकेट में ऐसे क्षण बन जाते हैं, जब सिर्फ स्कोरबोर्ड नहीं, पूरा माहौल बदल जाता है। बुधवार को विजय हजारे ट्रॉफी के मुकाबले में ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, और इसका केंद्र थे — बिहार के बल्लेबाज़ Sakibul Gani।
जब गनी क्रीज़ पर आए, माहौल बिल्कुल सामान्य था। मैच अपनी रफ्तार में आगे बढ़ रहा था। लेकिन कुछ ही ओवर बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। गनी ने तेज़ गति से रन बनाना शुरू किया, चौकों-छक्कों की झड़ी लगाई और स्टेडियम में मौजूद दर्शक खड़े होने पर मजबूर हो गए।
गेंदबाज़ लगातार प्लान बदलते रहे, लेकिन गनी हर बार जवाब देते रहे। हर शॉट के साथ मैदान में गूंजने लगी एक ही आवाज़—
“वाह गनी! ये क्या खेल दिया!”
32 गेंद — और पूरा गेम पलट!
विजय हजारे ट्रॉफी के इस मुकाबले में मानो पूरा खेल ही बदल गया। महज़ 32 गेंदों में शतक लगाते हुए सकीबुल गनी ने बल्ले से ऐसा तूफ़ान खड़ा कर दिया कि गेंदबाज़ों के सारे प्लान धरे के धरे रह गए। 40 गेंदों पर 128 रन, जिसमें 10 चौके और 12 छक्के शामिल थे—हर शॉट के साथ दबदबा साफ़ दिख रहा था। कभी सीधा स्ट्रेट ड्राइव, कभी पुल शॉट, तो कभी लॉन्ग ऑन के ऊपर से ऊँचा छक्का—गनी की बल्लेबाज़ी देखने में ऐसा अहसास हो रहा था मानो उनका बल्ला बोल रहा हो और पूरा मैदान उसे सुन रहा हो।
मोतिहारी का लड़का Sakibul Gani — बड़े सपनों के साथ
सोचिए — एक छोटे शहर का बच्चा,
धूल भरे मैदान, पुरानी गेंद, टूटा-सा नेट,
लेकिन दिल में सपना —
“एक दिन मैं भी नाम बनाऊंगा।”
माँ-बाप चाहते थे पढ़ाई करे,
लेकिन गनी कहते —
“बस थोड़ा और खेलने दो…”
लोकल अकादमी, सुबह-शाम प्रैक्टिस,
बार-बार फ़ेल, फिर उठना —
यही उनकी असली ट्रेनिंग थी।
रणजी डेब्यू — और सीधा तिहरा शतक
पहला ही रणजी मैच —
और सकीबुल ने 341 रन ठोक दिए!
कमेंट्री बॉक्स में हैरानी,
ड्रेसिंग रूम में ताली,
और विपक्षी टीम बस एक ही बात सोचती रह गई —
“ये डेब्यू है — या चेतावनी?”
उस दिन से हर कोई जान गया —
यह लड़का सिर्फ खेलने नहीं आया,
इतिहास लिखने आया है।
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कप्तान बनकर और भी खतरनाक
समय के साथ जिम्मेदारियाँ बढ़ीं और सकीबुल गनी अब टीम के कप्तान बन चुके हैं। आम तौर पर कप्तानी मिलते ही कई खिलाड़ी दबाव महसूस करने लगते हैं, लेकिन गनी ने इस दबाव को अपने लिए हथियार बना लिया। टीम जब मुश्किल में होती है, वे सबसे पहले आगे आते हैं, और जब रन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब वही मोर्चा संभालते दिखते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ — 32 गेंदों में शतक ठोककर गनी ने मानो यह संदेश दे दिया कि अब उनका आत्मविश्वास अलग स्तर पर है और सचमुच, दिल से आवाज़ आई — “यह मेरा समय है!”
❤️ क्यों पसंद आता है ऐसा खिलाड़ी?
क्योंकि उसके शॉट्स में सिर्फ ताकत नहीं,
कहानी होती है।
गरीबी, संघर्ष, यात्राएँ, रिजेक्शन —
सब कुछ जैसे हर चौके में, हर छक्के में दिखाई देता है।
और जब वह बैट उठाकर हल्की-सी मुस्कान देता है —
लगता है जैसे कह रहा हो:
“देखो… सपने सच होते हैं।”
आने वाला कल?
अगर यही फॉर्म जारी रहा
तो दरवाज़े बड़े होंगे —
बहुत बड़े।
सेल्क्टर्स देख रहे हैं,
फैंस इंतज़ार कर रहे हैं,
और बिहार गर्व से कह रहा है —
“हमारे पास भी स्टार है!”
निचोड़
सकीबुल गनी सिर्फ रिकॉर्ड का नाम नहीं, वो उन सपनों की आवाज़ है जो छोटे शहरों की गलियों में पनपते हैं। चुपचाप मेहनत करने वाला वो लड़का, जिसने मैदान पर आकर पूरे आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया। 32 गेंदों का शतक हो या रणजी में तिहरा धमाका — उसकी हर पारी जैसे कहती है कि मेहनत कभी धोखा नहीं देती, बस सही वक्त पर चमककर सबको चौंका देती है। कप्तान बनने के बाद दबाव में टूटने के बजाय उसने दबाव को ही हथियार बना लिया — टीम मुश्किल में हो तो सबसे आगे वही, रन चाहिए हों तो फिर वही।
अब जब भी Sakibul Gani बैटिंग के लिए उतरता है, बस एक ही सवाल हवा में तैरता है — क्या आज वो फिर कुछ ऐसा करने वाला है जो रिकॉर्ड बुक हिला दे?
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