AI के ज़माने में संजीव सान्याल का कहना है कि UPSC अब काम का नहीं रहा

अर्थशास्त्री संजीव सान्याल UPSC और पारंपरिक शिक्षा की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए, AI-संचालित भविष्य में कौशल विकास और अनुभव आधारित शिक्षा पर जोर

अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने नौकरी की सुरक्षा के लिए UPSC परीक्षा की तैयारी को “समय की बर्बादी” बताकर एक ज़ोरदार राष्ट्रीय बहस फिर से शुरू कर दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत की शिक्षा और करियर की उम्मीदें AI से चलने वाले भविष्य की असलियत से खतरनाक तरीके से अलग हैं।

सालों से भारत में युवाओं की सिविल सेवा परीक्षा और उच्च शिक्षा के प्रति एकतरफा दौड़ देखी जा रही है। हर साल लाखों उम्मीदवार UPSC के सीमित पदों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, लेकिन सफलता की दर बेहद कम होती है। संजीव सान्याल का तर्क है कि इस परंपरा में वर्षों बर्बाद करना और स्थिरता की तलाश करना अब समय और संसाधनों की बर्बादी है।

UPSC तैयारी: जोखिम बनाम लाभ

सान्याल ने विशेष रूप से पेशेवर UPSC उम्मीदवारों की बात की, जो बिना सफलता के बार-बार परीक्षा देते हैं। उनका कहना है कि ऐसे उम्मीदवार अपने सालों की उत्पादक क्षमता खो देते हैं। सान्याल के अनुसार, “अगर आप इतना बड़ा जोखिम उठाने जा रहे हैं, तो ब्यूरोक्रेट क्यों बनें?” यह बयान यह दर्शाता है कि नौकरी की सुरक्षा के लिए UPSC पर निर्भर रहना अब एक वास्तविक विकल्प नहीं रहा

पारंपरिक यूनिवर्सिटी मॉडल क्यों पिछड़ रहे हैं?

सान्याल ने पारंपरिक यूनिवर्सिटी सिस्टम की भी आलोचना की। उनके अनुसार, लेक्चर-आधारित शिक्षा और कठोर शैक्षणिक संरचनाएं आज के कामकाजी माहौल और AI की गति के साथ मेल नहीं खातीं। कौशल सीखने की प्रक्रिया तेजी से बदल रही है, जबकि यूनिवर्सिटी सिलेबस अक्सर पुराने मॉडल पर आधारित रहते हैं।

संजीव सान्याल कहा, “AI अत्याधुनिक ज्ञान देने में कहीं बेहतर होगा।” इसका मतलब यह है कि समस्या केवल शिक्षा की गुणवत्ता की नहीं, बल्कि सीखने और कौशल विकास की संरचना में है।

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अनुभव आधारित शिक्षा और अप्रेंटिसशिप की जरूरत

सान्याल ने सुझाव दिया कि युवाओं को वर्कफोर्स में जल्दी शामिल होना चाहिए और शिक्षा को मॉड्यूलर और फ्लेक्सिबल बनाना चाहिए। उन्होंने अप्रेंटिसशिप और शुरुआती काम के अनुभव पर ज़ोर दिया। उनका कहना है कि हायर एजुकेशन हमेशा सभी के लिए अनिवार्य नहीं रही है, और आज भी समाज के कई लोग बिना यूनिवर्सिटी जाए भी प्रोडक्टिव जीवन जीते हैं।

अपने कॉलेज के अनुभव को साझा करते हुए, सान्याल ने कहा कि लंबे अकादमिक साइकल में फंसने से उनका अधिक समय बेकार गया। उन्होंने ऐसे सिस्टम की वकालत की जो लोगों को जल्दी काम करने, मॉड्यूलर तरीके से पढ़ाई करने और तैयार होने पर परीक्षा देने की अनुमति दे, जिससे अधिक कुशल और व्यावहारिक परिणाम मिलें।

निष्कर्ष

संजीव सान्याल की ये टिप्पणियां भारत में शैक्षणिक और करियर प्राथमिकताओं पर गहरी बहस को फिर से शुरू करती हैं। उनका कहना है कि UPSC और पारंपरिक यूनिवर्सिटी मॉडल तेजी से बदलती दुनिया के लिए पर्याप्त नहीं हैं। युवाओं को AI-सक्षम कौशल, अनुभव आधारित शिक्षा, और फ्लेक्सिबल सीखने के अवसर अपनाने की आवश्यकता है।

इस बहस का उद्देश्य केवल आलोचना नहीं है, बल्कि भारत के युवा वर्कफोर्स को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। ऐसे समय में जब AI, ऑटोमेशन और नई तकनीकें अर्थव्यवस्था को बदल रही हैं, यह सवाल बेहद प्रासंगिक हो जाता है: क्या हमारा शिक्षा और करियर सिस्टम युवाओं को 21वीं सदी के काम के लिए तैयार कर रहा है, या उन्हें पुराने, स्थिर और रैखिक सपनों में फंसा रहा है?
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Reference: Indiatoday